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इस अभिनेत्री ने बचपन में की थी डांस सीखने की जिद तो गुरु ने कहा था- मैं मुस्लिम को भरतनाट्यम नहीं सिखाती…..

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बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली अभिनेत्रियां केवल एक्टिंग में ही नहीं बल्कि डांसिंग में भी बहुत माहिर होती है. इन अभिनेत्रियों का डांस लोगों को काफी पसंद भी आता है. लेकिन आज हम आपको उस मुस्लिम अभिनेत्री के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने बचपन में डांस सीखने की जिद की थी. लेकिन मुस्लिम होने के कारण इस अभिनेत्री को गुरु ने डांस सिखाने से मना कर दिया था.

हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की वेटरन एक्ट्रेस वहीदा रहमान की. 50 के दशक में वहीदा रहमान का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता था. वहिदा रहमान एक बहुत ही बेहतरीन भरतनाट्यम डांसर हैय समयवहीदा रहमान ने उस समय डांस सीखा, जब मुस्लिम परिवारों में इसे अच्छा नहीं माना जाता था. इतना ही नहीं शुरुआत में वहीदा रहमान के गुरु ने भी उन्हें अपनी शिष्या बनाने से इंकार कर दिया था. बचपन से ही वहीदा रहमान भरतनाट्यम की शौकीन थी और वे अपनी मम्मी से अक्सर जिद करती थी कि वो उन्हें अच्छे उस्ताद से तालीम दिलवाए.

वहीदा रहमान की अम्मी रूढ़िवादी विचारधारा की नहीं थी. लेकिन मुस्लिम परिवार के होने के नाते उन्होंने अपनी बेटी की बात को टालने की कोशिश की. लेकिन वहीदा जी अपनी जिद पर अड़ी रही. जिसके बाद वहीदा जी की अम्मी उन्हें भरतनाट्यम के मशहूर गुरु जयलक्ष्मी अल्वा के पास ले गई. जब वहीदा जी ने जय लक्ष्मी को सलाम किया तो उन्होंने पूछा- तुम मुस्लिम हो जवाब में वहीदा जी ने हां कहा. इसके बाद जयलक्ष्मी अल्वा ने कहा- मैं मुस्लिम को भरतनाट्यम नहीं सिखाती. 4 दिन की सिखोगी, फिर घर और खानदान के डर से सीखना बंद कर दोगी. मैं ऐसी शिष्या नहीं बनाती, जो तालीम अधूरी छोड़ दे.

लेकिन जब गुरु जी ने वहीदा रहमान को भरतनाट्यम सिखाने से इंकार कर दिया तो वो जिद पर अड़ गई. वहीदा जी की जिद के आगे लक्ष्मी जी झुक गई और उन्होंने एक शर्त रखी. उन्होंने वहीदा रहमान से उनकी जन्म कुंडली मंगवाई और कहा अगर कुंडली में हुआ कि तुम मुझसे सीखकर किसी काबिल बनोगी, तो मैं तुम्हें भरतनाट्यम सिखाउंगी. लेकिन वहीदा रहमान के पास कुंडली नहीं थी और ना ही वे ला सकती थी. लेकिन वह भरतनाट्यम सीखना चाहती थीं. तब गुरुजी ने जन्म, निर्धारित समय सहित अन्य जानकारियां ली और कल आने को कहा

लक्ष्मी जी ने कहा- मैं खुद कुंडली बनवाकर देखूगी. उस समय रात भर मेहनत करके लक्ष्मी जी ने कुंडली बनाई. जब अगले दिन शाम को वहीदा वहां पहुंचीं तो गुरुजी ने उनका जोरदार स्वागत किया. यह देखकर वहीदा और उनकी मां हैरान रह गई. उस समय वहीदा रहमान की गुरु जी ने कहा- कल से तालीम लेने आ जाओ. मैंने देख लिया, पढ़ लिया, तुम्हारी कुंडली में लिखा है कि तुम मेरा नाम रोशन करोगी और भरतनाट्यम का मान रखोगी.

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