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किसानों ने 2-2 रुपये बचाकर बनाया था इस फिल्म को, जिसे मिला था राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

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हमारे देश में हर साल सिनेमा जगत में हजारों फिल्में बनती हैं और बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होती हैं. इनमें से कुछ फिल्में लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाती हैं. आज हम आपको एक ऐसी फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे किसानों ने दो-दो रुपए बचाकर बनाया था. इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था.

यह फिल्म है- मंथन. यह फिल्म 1976 में देश में इमरजेंसी के दौरान रिलीज हुई थी. यह देश की पहली ऐसी फिल्म थी जो श्वेत क्रांति पर बनाई गई थी. इस फिल्म में किसानों और पशुपालकों के संघर्ष की दास्तां को बड़े पर्दे पर दिखाया गया था. इस फिल्म में गिरीश कर्नाड, नसरुद्दीन शाह, स्मिता पाटिल जैसे बड़े सितारे नजर आए थे. फिल्म का निर्देशन श्याम बेनेगल द्वारा किया गया था.

एक इंटरव्यू के दौरान फिल्म के निर्देशक श्याम बेनेगल ने बताया था- वे इस फिल्म की कहानी दुग्ध क्रांति यानी श्वेत क्रांति से जोड़ कर लिख चुके थे. फिल्म की प्रोडक्शन का काम पूरा हो चुका था. बस फिल्म पर पैसा लगाने वाले प्रोड्यूसर की कमी थी. लेकिन कोई भी फिल्म की कहानी पर पैसा लगाने के लिए तैयार नहीं था. वह काफी लोगों से मिले और उन्हें हर जगह से निराशा मिली.प्रोड्यूर्स न मिल पाने की दिक्कत से श्याम ने वर्गीज कुरियन से मुलाकात की. लेकिन उन्होंने सबसे पहले फिल्म का बजट पूछा, तो श्याम ने फिल्म का बजट 10 लाख रुपए बताया. उस समय यह काफी ज्यादा था,

श्याम की बात सुनने के बाद वर्गीस ने उन्हें अमूल सोसाइटी से जुड़े किसानों से मिलने की सलाह दी. इसके बाद वे किसानों के पास गए और उनसे आग्रह किया था कि आप अपनी 1 दिन की कमाई से सिर्फ 2 इरुपए स फिल्म के लिए दान कर दीजिए. ताकि आपके संघर्ष कहानी को दुनिया को दिखाया जा सके. श्याम की नियति साफ थी और ऊपर वाले ने भी उनकी सहायता की.

किसानों ने श्याम की बात मान ली, उस वक्त अमूल सोसाइटी से 5 लाख किसान उनके साथ जुड़े. सब ने दो-दो रुपए इकट्ठा किए और फिल्म का निर्माण हुआ. फिल्म मंथन भारतीय इतिहास की पहली ऐसी फिल्म रही जिसके प्रोड्यूसर 5 लाख किसान थे. आपको बता दें कि विजय तेंदुलकर को इस फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखने के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी दिया गया था.

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