बिहार में करोड़ो की लागत से बन रहा है फ़ूड पार्क, जानिए किस ज़िले में हो रहा इस फैक्ट्री का निर्माण

भारत सरकार आने वाले समय में भारत के अलग-अलग जगहों पर फूड पार्क स्थापित करने की योजना बना रहा है। जानकारी के अनुसार इन मिनी फूड पार्क की मदद से देश के अलग-अलग जगहों के फल तथा वनस्पतियों को पूरे देश में प्रसिद्ध करने की योजना है। इसी कड़ी में बिहार इन फूड पार्क का हब बनकर सामने आने जा रहा है।

जानकारी के अनुसार केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्रालय ने इन फूड पार्क को मैनेज करने के लिए बिहार में श्रृंखलाबद्ध करने की तैयारी शुरू कर दी है। आपको बता दूँ की इसमें मखाना, लीची और केला पर आधारित उत्पादों के मिनी फूड पार्कों का नेटवर्क बनाया भी जा रहा है। आपको बता दूँ की इसी कड़ी में अभी फिलहाल बिहार के मुजफ्फरपुर में मेगा फ़ूड पार्क का काम शुरू है, और इसकी जानकारी खुद उधोग मंत्री शाहनवाज़ हुसैन ने दी।

खबरों की माने तो बिहार के मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में करीब 400 करोड़ की लगत से फ़ूड पार्क बनाया जा रहा है जिसे बायोफ्यूल्स प्रा. लि. लगा रही है इसके साथ साथ यहाँ पर इथेनॉल प्लांट का भी निर्माण किया जा रहा है जिसे भारत ऊर्जा प्रा. लि. बना रही है वही मुजफ्फरपुर में अभी कुछ काम जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।

आज मुजफ्फरपुर में उद्योग विभाग की सभी योजनाओं की समीक्षा बैठक से पहले पताही में लीची, जामुन, अन्य फलों से जूस तैयार करने की कंपनी यूनिक फूड्स की उत्पादन इकाई का निरीक्षण किया और निदेशक श्री अनिल केडिया जी से इकाई की बारीकियां समझी। BJP MLA श्री अरुण कुमार सिंह जी भी मौजूद रहे। pic.twitter.com/XApkxpODov

– Syed Shahnawaz Hussain (@ShahnawazBJP) December 22, 2021

बिहार को मिनी फूड पार्क स्थापित करने के लिए मिलेगा अनुदान

बता दे की मिनी फूड पार्क खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का एक परिसर होता है। वहां कई खाद्य प्रंसस्करण औद्योगिक इकाइयों को एक ही परिसर में लगाया जाता है। उनकी सुविधा के लिए परिसर में शीत संयंत्र, पैकेजिंग प्लांट और ग्राइंडिंग, रिफाइनिंग तथा क्वालिटी कंट्रोल के लिए परिसर में ही सहायक इकाई होती है।

वही भारत सरकार मिनी फूड पार्क स्थापित करने के लिए 10 करोड़ से लेकर 50 करोड़ तक का अनुदान देने की योजना हैं। इस सर्वेक्षण से बिहार के कुछ खास इलाकों को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के कच्चा माल के उत्पादन सुधारकर अच्छी गुणवत्ता के स्तर तक ले जाने और उन्हें कोल्ड चेन नेटवर्क के जरिए संरक्षित कर प्रसंस्करण केंद्रों तक ले जाने का इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। 

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