बिहार के इन 20 शहरों के लिए बन रहा है मास्टरप्लान, जानिए क्या होगा खास और किन शहरों का हुआ चयन! …

बिहार के प्रमुख शहरों का आयोजना क्षेत्र यानी प्लानिंग एरिया तय होने के बाद अब मास्टरप्लान बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत सीतामढ़ी, लखीसराय समेत नौ शहरों का भोगौलिक सूचना प्रणाली (जीआइएस) आधारित मास्टरप्लान तैयार किया जाएगा। इस तकनीक से पूरे प्लानिंग एरिया की वास्तविक मैपिंग होगी। इसमें जमीन, सड़क, प्रोपर्टी की स्थिति आसानी से पता चलेगी। आनलाइन व्यवस्था होने से आम आदमी भी एक क्लिक पर जमीन उपयोग को स्क्रीन पर देख सकेगा। नगर विकास एवं आवास विभाग ने नोटिस जारी कर इसके लिए एजेंसियों से प्रस्ताव मांगा है। इसके लिए 17 जनवरी तक आनलाइन आवेदन करना है, जिसकी हार्ड कापी 18 जनवरी तक विकास भवन स्थित विभाग के मुख्यालय में जमा करनी होगी। 18 जनवरी को ही शाम चार बजे निविदा खोली जाएगी।


तीन श्रेणी में बांटे गए हैं शहर

जीआइएस आधारित मास्टरप्लान के लिए चुने गए नौ शहरों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। पहली श्रेणी में अररिया, फारबिसगंज व खगड़‍िया, दूसरी श्रेणी में लखीसराय, जमुई व भभुआ जबकि तीसरी श्रेणी में शिवहर, सीतामढ़ी और मधुबनी को रखा गया है।

किन-किन शहरों का हुआ चयन

बता दें, भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित मास्टरप्लान के लिए बिहार के अलग-अलग शहरों का चयन तीन श्रेणी के तहत किया गया है, जिसमें पहली श्रेणी में अररिया, फारबिसगंज व खगड़‍िया, दूसरी श्रेणी में लखीसराय, जमुई व भभुआ, वहीं तीसरी श्रेणी में शिवहर, सीतामढ़ी और मधुबनी को शामिल किया गया है. इसके अलावा पहले से ही 11 अन्य शहरों के लिए भी मास्टरप्लान तैयार करने की प्रक्रिया जारी है. नगर विकास विभाग के अनुसार इसमें बक्सर, किशनगंज, कटिहार, सासाराम, डेहरी, मोतिहारी, औरंगाबाद, हाजीपुर, सिवान, बेतिया व बगहा आदि शामिल हैं.

11 अन्य शहरों का मास्टरप्लान भी प्रक्रियाधीन

नगर विकास विभाग ने हाल ही में 20 शहरों का आयोजना क्षेत्र तय किया है। अभी चुने गए नौ शहरों से पूर्व 11 अन्य शहरों के मास्टरप्लान की प्रक्रिया भी जारी है। इसमें बक्सर, किशनगंज, कटिहार, सासाराम, डेहरी, मोतिहारी, औरंगाबाद, हाजीपुर, सिवान, बेतिया व बगहा आदि शामिल हैं।

मास्टरप्लान बन जाने से होगा सुनियोजित विकास

हाल के वर्षों में राज्य के जिला और अनुमंडल मुख्यालय में शहरीकरण तेजी से बढ़ा है। इसकी जद में मुख्य शहर के साथ आसपास के गांव भी आ गए हैं। अभी तक अनियोजित ढंग से शहर के विस्तार आदि का काम हो रहा है। इसी कारण विभाग ने पहले शहर और आसपास के गांवों को जोड़कर आयोजना क्षेत्र तय किया और अब भूमि का इस्तेमाल चिन्हित कर मास्टरप्लान पर काम शुरू होगा। इसमें सड़क, नाले, व्यावसायिक इलाके, आवासीय इलाकों आदि का जिक्र होगा। जीआइएस आधारित होने से डिजिटल नक्शे के रूप में इसे देखा जा सकेगा।

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