Bride rides Horse: घोड़ी पर सवार होकर शादी करने पहुंची ‘पापा की परी’, मां ने कहा- बोझ नहीं होती हैं बेटियां

अभी तक आपने दूल्हे को घोड़ी पर सवार होकर दुल्हन के घर बारात लेकर जाते देखा होगा, लेकिन किसी दुल्हन को घोड़ी पर सवार होकर दूल्हे के घर बारात लेकर जाते हुए नहीं देखा होगा. ऐसी अनोखी शादी बिहार के गया जिले में हुई है. यहां के चांद चौरा स्थित एक निजी धर्मशाला से दुल्हन अनुष्का गुहा अपने दूल्हे को लाने के लिए बारात में घोड़ी पर सवार होकर पहुंचीं. इस दौरान दुल्हन के इस अंदाज को देखने के लिए रास्ते से गुजर रहे लोगों की भीड़ लगी रही.

इंडिगो एयरलाइंस में हैं अनुष्का

मिली जानकारी अनुसार, दुल्हन अनुष्का की मां स्कूल में म्यूजिक टीचर हैं. उनके पिता की दवा की दुकान है. अनुष्का खुद इंडिगो में सीनियर केबिन क्रू के पद पर कार्य कर रही हैं. जबकि दूल्हा जीत मुखर्जी कोलकाता के रहने वाले हैं और वो सिक्योरिटी एंड रिस्क मैनेजमेंट में काम कर रहे हैं.

अनुष्का की मां ने कही ये बात

दुल्हन अनुष्का की मां सुष्मिता बोस ने कहा कि बेटे और बेटी में कोई अंतर नहीं है. समाज में जितना अधिकार बेटों को है. उतना ही अधिकार बेटियों को भी है. वो बोझ नहीं हैं. शादी के पहले ही बेटी ने यह प्लानिंग की थी तो उन्होंने भी इसमे रजामंदी दे दी और फिर कहा कि बेटी घोड़ी पर बैठेगी और यही हुआ.

अनुष्का ने कहा, “ऐसा करके समाज में यह संदेश देना चाहती हूं कि लड़कियां अपने परिवार पर बोझ नहीं होती हैं. जब बेटे अपनी शादी में अपने अनुसार सारा कुछ करते हैं, तो बेटियां ऐसा क्यों नहीं कर सकती हैं.” जीत मुखर्जी ने बताया कि शादी के पहले अनुष्का ने यह कहा था कि बाईलॉजिकल अंतर के अलावे बेटे और बेटियों में कोई अंतर नहीं होता है. शौक सभी की होती है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ दूल्हे ही घोड़ी पर सवार होकर दुल्हन के घर पहुंचते हैं. बल्कि ऐसा भी हो सकता है कि दुल्हन ऐसा करे. इसलिए मैंने भी एक कोशिश की है.

उन्होंने कहा कि इससे दुल्हन भी खुश है. बेटे-बेटियों में अंतर को समाप्त करने के उद्देश्य से ही यह किया गया है. भारत में अक्सर लड़कियों के जन्म लेने पर उन्हें मार दिया जाता है ,जात-पात की अवधारणा है. तो समाज में इस अंतर को समाप्त करने के लिए ये हमारी एक छोटी सी कोशिश की है.

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