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नीतीश सरकार का फैसला, बिहार में 780 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया

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जिले के स्वास्थ्य विभाग में बहाली में धांधली का पटाक्षेप हो गया है। विभागीय निर्देश पर सिविल सर्जन डॉ. एसके चौधरी ने मंगलवार को मानव बल के रूप में बहाल सभी 780 कर्मियों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। उन्होंने पीएचसी प्रभारियों को मानव बल से काम न लेने का आदेश जारी कर दिया है। एक माह पूर्व जिले में कोविड से लड़ाई के लिए बहाल किए गए 780 कर्मियों की सेवा मंगलवार से समाप्त कर दी गई।

राज्य स्वास्थ्य समिति के आदेश पर सिविल सर्जन ने इस आशय का पत्र जारी कर दिया। पीएचसी प्रभारियों को भेजे निर्देश में सिविल सर्जन ने कहा है कि मानव बल की बहाली को मुख्यालय ने रद्द कर दिया है। इस आलोक में मानव बल की सेवा समाप्त की जाती है।

सिविल सर्जन के इस पत्र के साथ ही जिले में बहाली को लेकर उठा बवंडर शांत हो गया है। सिविल सर्जन ने कहा कि मुख्यालय के निर्देश पर मानव बल की सेवा समाप्त की गई है। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की जांच में बहाली में धांधली के आरोपों की पुष्टि हुई थी। इसके बाद डीएम प्रणव कुमार ने जांच रिपोर्ट के साथ ही मुख्यालय से कार्रवाई की अनुशंसा की थी।

अब दोषी कर्मी-अधिकारी पर होगी कार्रवाई
मानव बल की सेवा समाप्त होने के बाद विभागीय स्तर पर दोषी कर्मचारी व अधिकारी पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। डीडीसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में तीन लिपिक व कंप्यूटर ऑपरेटर पर कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इस रिपोर्ट के आधार पर कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा तो समाप्त कर दी गई, लेकिन लिपिकों पर अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभाग ने भी इस मामले में कार्रवाई का निर्देश दिया है। हालांकि, अधिकारियों ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार किया है।

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